हमें भक्ति सेवा/भक्ति(Devotional service ) क्यों करनी चाहिए?

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हमें भक्ति सेवा/भक्ति(Devotional service ) क्यों करनी चाहिए?

सभी लोगो की कई प्रकार की प्राथमिकताए है पर हम सभी भक्त है इसलिए आये देखे हमें भक्ति सेवा/भक्ति हमारी प्राथमिकता क्यों होनी चाहिए।

सबसे पहली बात है आपको अपने जीवन मे कृष्ण भक्ति लाने के लिए सब कुछ ठीक होने की या अनुकूल परिस्थितियों के आने की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नही है। यह कभी भी  नहीं होगा। हमेशा चुनौतियाँ, बाधाएँ और परिस्थियां हमेशा आदर्श परिस्थितियों से कम ही मिलेंगी।

अ।पने भक्ति मय जीवन के बारे में अभी तक सोंचा नही है तो क्या हुआ? अभी शुरू हो जाओ। आपके द्वारा उठाए गए प्रत्येक कदम के साथ, आप भक्ति में  मजबूत, अधिक से अधिक कुशल और अधिक आत्मविश्वासी और अधिक से अधिक शुद्ध भक्त होते जाएंगे!

आत्मविश्वास आपको गलती करने और असफलता का सामना करने की आजादी देता है।तो चाहे आप अपनी भौतिक अवस्था के कारण बहुत अच्छे से विधि भक्ति नही कर पा रहे है तो भी बिना यह महसूस किए कि आपकी दुनिया भौतिक जीवन पर स्थिर है और भक्ति सेवा की उम्मीदें खत्म हो गई है या लाख प्रयासों के बावजूत आप असफल हैं अपने जीवन को भक्तिमय बनाने में तो भी हार मत मानिये। जिसे खुद पर भरोसा है, वही दूसरों का विश्वास हासिल करेगा उन्हें कृष्ण भक्ति में जोड़ पायेगा।

अपने आप पर भरोसा रखे। उपलब्धि की लपटों में संभावना की छोटी, आंतरिक चिंगारियों को हवा देकर  कृष्ण भक्ति के अधिकतम प्रचार के लिए प्रयासरत रहे !

अपने  आत्मविश्वास को कृष्ण की  सेवा में इस्तेमाल करना होगा। इसका एक विशिष्ट उदाहरण श्रील प्रभुपाद हैं – जिनके पास इक्सकॉन आंदोलन शुरू करते समय स्पष्ट रूप से अधिक भौतिक संपत्ति नहीं थी – लेकिन सर्वोच्च भगवान और उनके गुरु महाराज पर इतना विश्वास और पूर्ण निर्भरता थी। बाकी सब तो आप जानते ही है।

आपको बस सोचना है, इस दिशा में प्रयास करने है शेष सबकुछ कृष्ण पर छोड़ दे। पूरी भगवदगीता सुनने के बाद आख़िरी के कुछ श्लोको में भगवान अर्जुन को युद्ध रूपी सेवा कर्म करने के लिए प्रेरित करते हए कहते है, (श्लोक 18.58 में  कृष्ण कहते है)- “अब यदि आप मेरे प्रति जागरूक हो जाते हैं, तो आप मेरी कृपा से बद्ध जीवन की सभी बाधाओं को पार कर जाओगे। तथापि, यदि आप ऐसी चेतना में कार्य नहीं करते हैं, लेकिन झूठे अहंकार के माध्यम से कार्य करते हैं, मेरी बात नहीं सुनते, तो आप भौतिक जीवन मे खो जाएंगे।”

श्रील प्रभुपाद इस श्लोक के तात्पर्य में क्या कहते है पढ़िए-” पूर्ण कृष्ण भावनामृत व्यक्ति अपने अस्तित्व के कर्तव्यों को निभाने के लिए अनावश्यक रूप से चिंतित नहीं होता है। मूर्ख सभी चिंताओं से इस महान स्वतंत्रता को नहीं समझ सकते हैं।”(इन लाइनों में पूर्ण शब्द महवपूर्ण है यह केवल पूर्ण रूप से जो कृष्ण भावनामृत में है उनके लिए है यद्यपि आप अपने कर्तव्यों को निभाते हुए भी भक्तिमय जीवन जी सकते है इसे कहते है – भौतिक और आध्यात्मिक कर्तव्यों में सामंजस्य स्थापित करना)

जो कृष्ण भावनामृत में कार्य करता है, उसके लिए भगवान कृष्ण सबसे घनिष्ठ मित्र बन जाते हैं। तब आप हमेशा अपने मित्र कृष्ण को सुख पहुचने  के लिए प्रयास करते है, और आप अपने आप को अपने मित्र को दे देते है, तब आप प्रभु को प्रसन्न करने के लिए चौबीस घंटे काम करने में इतना समर्पित रहते है की भौतिक जीवन के ताप सहन करना आसान हो जाता है, आप खुद को मानसिक स्तर पर स्वतंत्र महसूस करते है । इसलिए, किसी को भी जीवन की शारीरिक अवधारणा के झूठे अहंकार में डूबा नहीं रहना चाहिए।

जब आप भक्ति नही करते तो आपको खुद तो मिथ्या रूप से स्वतंत्र व्यवहार कर्ने के लिए, निंदनीय अनियंत्र जीवन जीने के लिए खुद को स्वतंत्र नहीं समझना चाहिए। हम सभी पहले से ही सख्त भौतिक कानूनों के अधीन है। आप देखेंगे कि आप सोचते कुछ है और होता कुछ और है।आप महसूस कर सकते है कि आप स्वतंत्र नही है।

लेकिन जैसे ही आप कृष्ण भावनामृत में कार्य करते है,आप मानसिक रूप से बलवान और खुद को भौतिक उलझनों से मुक्त महसूस करेंगे क्यों कि अब आपकी प्राथमिकताएं बदल चुकी है ।

बहुत सावधानी से ध्यान देना चाहिए कि जो कृष्ण भावनामृत में सक्रिय नहीं है, वह अपने आप को भौतिक भँवर में, जन्म और मृत्यु के सागर में डुबो रहा है। कोई भी बद्ध आत्मा वास्तव में नहीं जानता कि क्या करना है और क्या नहीं करना है, हम सभी गलतियां करते है लेकिन जो व्यक्ति कृष्ण भावनामृत में कार्य करता है वह कार्य करने के लिए स्वतंत्र है क्योंकि आप भक्तिमय जीवन के लिए जो प्रयास करते है वह सब कुछ कृष्ण द्वारा भीतर से प्रेरित और आध्यात्मिक गुरु द्वारा पुष्टि किया गया होता है। वहां मनमानी नही की जाती।

जीवन जन्म से लेकर मृत्यु तक एक संघर्ष है हम सब के जीवन की एक अलग महाभारत है तो अगर संघर्ष करना ही है तो क्यों न कृष्ण के लिए किया जाए जैसे अर्जुन ने किया । मैं आपसे यह नही कहूंगी की कृष्ण भक्ति से कोई जादू होगा और रातो रात आपकी सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। ऐसा नही होगा( या हो सकता है आपके मामले में यदि कृष्ण की इच्छा होगी तो, चमत्कार करना कृष्ण के लिए कोई बड़ी बात नही है) तो चाहे जो हो भक्ति सेवा(भक्ति) करनी चाहिए।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण

कृष्ण कृष्ण हरे हरे

हरे राम हरे राम

राम राम हरे हरे

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